मुझे अपनी चुत गांड चुदवाने को लंड चाहिए-3

लेडीज़ टेलर सेक्स कहानी में पढ़ें कि मुझे अपना सूट जल्दी सिलवाना था. मैं दर्जी की दूकान पर गयी तो अपना काम जल्दी कराने के बदले चुद गयी.हैलो साथियो, मैं आपकी अरुणिमा फिर से आपको अपनी चुत चुदाई की दुनिया में सैर कराने आ गई हूँ.
लेडीज़ टेलर सेक्स कहानी के पिछले भाग
धोबी के घर जाकर चूत चुदवा कर आयी
में अब तक आपने पढ़ा था कि टेलर मास्टर ने मेरी चुत चाट कर मुझे झड़ा दिया था और मेरी चुत के नमकीन रस को पी गया था.

अब आगे लेडीज़ टेलर सेक्स कहानी:

आप इस कहानी को लड़की की आवाज में भी सुन सकते हैं.

अब टेलर मास्टर ने अपना मुँह पीछे करके मेरी गांड के छेद को चाटना शुरू कर दिया और उसमें अपनी उंगली को भी अन्दर बाहर करना चालू कर दिया.

मेरी गांड और चुत को गर्म करके वो खड़ा हो गया और उसने अपना पजामा और कच्छा उतार फेंका.
उसका 6 इंच का लंड मेरे सामने लहराने लगा. मैंने देखा कि उसके लंड पर थोड़े से बाल थे.

उसने लंड को चूसने को बोला, तो मैं अपने घुटनों पर बैठ कर उसका लौड़ा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और वो वासना में लीन होकर सीत्कार भरते हुए लंड चुसाई के मज़े लेने लगा.

पांच मिनट बाद उसने मेरा मुँह अपने लंड से हटाया और मुझे सीधा खड़ा करके सामने की दीवार के सहारे टिका दिया.
मेरी एक टांग को उठा कर उसने मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया.

मेरी मीठी सी सिसकारी छूट गई और वो मुझे धकापेल चोदने लगा.

कुछ देर बाद उसने मुझे अपनी मेज़ पर उल्टा करके लिटा दिया. इस पोजीशन में मेरे पैर जमीन पर लटके थे.
उसने मेरे पीछे से मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया.

उसका मोटा लंड जैसे ही ही मेरी गांड के छेद में घुसा तो मेरी एक कराह निकल गई.
मैंने कहा- मास्टर, कुछ चिकनाई लगा ले.

उसने थूक लगाया और मेरी गांड मारने लगा.

इसी तरह करीब बीस मिनट में उसने मेरी गांड में अपना माल छोड़ दिया.

मेरी चुत और गांड चुद कर मस्त हो गई थी.

उसने मेरी तरफ देख कर पूछा- लंड से मजा आया.
मैंने हंस कर आंख दबा दी.

हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहन लिए.

उसने मुझसे पूछा- शाम को ये सूट कब पहनना है.
मैं बोली- सात बजे.
उसने कहा- ओके, तुम 6 बजे आकर सूट ले लेना.

जब मैं अपनी चुत गांड मरा कर घर पहुंची, तो मम्मी से बात हुई.
मम्मी ये सुन कर अचंभित हो गईं कि वो शाम को सूट सिल कर दे देगा.

उनको क्या पता था कि उस टेलर मास्टर ने इसके बदले उनकी बेटी को रंडी की तरह चोदा भी है.

उसी शाम को जब मैं कपड़ा लेने गयी, तो पहले उसने मुझसे अपना लंड चुसवाया और सूट दे दिया.
मैं सूट लेकर घर आ गयी.

इसके बाद अब मम्मी का या मेरा कोई भी काम होता, तो मैं ही उसके पास जाती. वो मुझे चोदने के बदले जल्दी काम करके दे देता.

कुछ दिन बीतने के बाद मेरे घर में हॉल वाले बाथरूम का नल खराब हो गया था.

पापा ने एक प्लम्बर को दोपहर तक भेजा, तो उसने नल को देख कर कहा कि इसका नल बदलना पड़ेगा. इसमें से ऊपर गीज़र का तार भी गया है, तो पहले किसी बिजली वाले को बुला कर ये तार हटवाओ, तभी मैं काम करूंगा.

इस बात को मैंने पापा को बताया, तो उन्होंने उससे बात करके कहा- तुम काम शुरू करो, मैं अभी किसी बिजली वाले को भेजता हूँ.

पापा ने एक 26 साल के आस-पास का लड़का भेजा. जबकि वो प्लम्बर की उम्र 50 साल के आस-पास की था.
वो दोनों काम पर लग गए.

मैं अपने कमरे में आ गयी. उस समय मेरी मम्मी ऊपर थीं क्योंकि वो किसी के सामने नहीं जाती थीं.
ये काम मुझे ही अपने सामने करवाना था.

मैंने सोचा जब तक काम हो रहा है … तब तक मैं नहा लेती हूँ.

मैं अपने बाथरूम में आ गयी और अपने सारे कपड़े उतार कर मोबाइल में पोर्न चलाने लगी. ब्लू फिल्म हल्की आवाज़ में चला कर देखने लगी और मैंने अपने आपको गर्म कर लिया.

इस सब बीच में मुझे ये नहीं याद आया कि इन दोनों बाथरूम की दीवार एक ही है.

बिजली के काम से वो लड़का ऊपर चढ़ गया था. मैंने धीमी आवाज़ में ब्लू फिल्म चला रखी थी.

इसका नतीजा कुछ देर बाद ये निकला कि वो लड़का मेरे बाथरूम में नंगा हो कर घुस आया.
शायद मैंने कमरे और बाथरूम का दरवाजा भी बंद नहीं किया था.

मैं उसको यू अचानक इस अवस्था में देख कर सकपका गयी और उस पर चिल्लाने लगी.
मेरी बातों का उस पर कोई असर नहीं हुआ … बल्कि वो मेरे पास आकर मेरे साथ हरकत करने लगा.

जब मैंने इसके विरोध में उसको बोला- तू जानता नहीं है … मैं अभी चिल्ला कर सबको बुला लूंगी.
उसने बोला- ठीक है बुला लो … और ये जो तुम कर रही थी, वो सब भी बता देना … वरना मैं ही बता दूंगा.

उसकी बात सुनकर मैं एकदम से चुप हो गयी और मेरी चुप्पी में उसने मेरी रज़ामंदी भी भांप ली.
वो शुरू हो गया.

पहले तो उसने मेरी दोनों चुचियों पर हमला बोला और उसके बाद मुझे अपना लंड चुसाया.
फिर आधे घंटे तक मेरी चूत और गांड मारने के बाद उसने मुझे अपना सारा वीर्य भी पिला दिया.

तभी वो प्लम्बर भी नंगा होकर आ गया. उसके आते ही वो लड़का बाहर चला गया.

अब उस मादरचोद प्लम्बर ने भी मुझे पूरे जोश के साथ चोदा.
शायद आज ये हरामी काफी दिनों बाद किसी को चोद रहा था इसलिए उसका जोश देखते ही बन रहा था. मुझे हचक कर चोदने के बाद इसने अपने लंड का गाढ़ा माल मेरी गांड के अन्दर छोड़ दिया.

इन दोनों से चुदने के बाद मैं नहा कर बाहर गयी और उन दोनों को काम का पैसा दिया.
काम करने के बाद वो दोनों मुझे अपना नंबर दे कर चले गए.

अब तक मुझे पांच लंड मिल चुके थे. मेरी चुत और गांड काफी सुखी थी.

इसी तरह एक दिन शाम को मेरी मम्मी को पीठ दर्द होने लगा, तो उन्होंने पापा को दर्द के बारे में बताया.
पापा ने हमारे एक पहचान के डॉक्टर को फ़ोन करके उनसे बात की.
डॉक्टर साहब का नाम रोहित था; उनसे मम्मी का चैकअप कराने का दूसरे दिन का अपॉइंटमेंट ले लिया.

अगले दिन पापा के जाने के बाद मम्मी ने मुझसे कहा- तुम भी तैयार हो जाओ मेरे साथ चली चलना.

मैं अपने कमरे में आ गयी और नहा कर कपड़े पहनने लगी.
आज मैंने ब्लैक पैंटी और उसके ऊपर ब्लू शार्ट जींस पहनी थी. ये शॉर्ट जींस मेरी टांगों पर एकदम चिपकी हुई चुस्त थी.
इससे पीछे से मेरी गांड एकदम फूली हुई मस्त माल लग रही थी.

फिर ऊपर मैंने एक पीले रंग की ब्रा और उस पर एक हल्के क्रीम कलर का टॉप पहना. ये टॉप बिना बांह के था और उसका गला काफी गहरा था जिसमें से मेरी चुचियों के मस्त उभार साफ़ दिख रहे थे.

मेरे मम्मों के बीच के गहरी घाटी भी काफी हद तक दिख रही थी. जरा सा भी झुकने पर तो आप जानते ही हैं कि मर्द के लंड का क्या हाल होता है.

जब भी इस तरह का टॉप पहन कर कोई लड़की सामने से झुकती है, तो सबकी नज़रें उसके मम्मों पर ही टिक जाती हैं.

मेरा ये टॉप बहुत फिटिंग का और थोड़ा लम्बा था, तो उसको मैंने जींस के अन्दर खौंस लिया.
पैरों में हाई हील वाली सैंडल पहनी जिससे मेरे मम्मे एकदम तने हुए दिखने लगे और गांड तोप की तरह उठ गई.

फिर हल्का सा मेकअप करके मैं मम्मी के साथ डॉक्टर के यहां आ गयी.

वहां पहुंचते ही सबकी नज़रें मेरी ही चूचियों और गांड पर टिक गईं. कोई मेरी मटकती गांड ताड़ रहा था तो कोई कमर और कोई मेरी छाती का उभार देख रहा था.

ये सब देख कर उन सभी ने मेरा चेहरा भी देखा, जिस पर हर वक्त कामुकता साफ़ दिखाई देती थी.

मैं काउंटर पर गई, तो वहां एक लड़की बैठी थी. मैंने उससे डॉक्टर को पापा का नाम बताने को बोला और बताया कि आज मेरी मम्मी का चैकअप होना था. पापा ने डॉक्टर साहब से टाइम लिया था.

इसके बाद मैं मम्मी के पास आकर बैठ गयी.

करीब दस मिनट बाद एक कम्पाउंडर आया और वो दोनों हम दोनों को अन्दर ले गया.

डॉक्टर रोहित को मैंने बहुत पहले देखा था. आज उन्हें मैं काफी समय के बाद देख रही थी. उनमें काफी बदलाव आ गया था.

हमें देख कर वो अपनी कुर्सी से उठ कर आए. पहले तो उन्होंने मेरी मम्मी के पैर छुए.

मम्मी ने भी मुझे उनके पैर छूने का इशारा किया. जैसे ही मैं उनके आगे झुकी, तो उन्होंने मेरे नंगी बांह को पकड़ लिया और बोले- लड़कियां पैर नहीं छूतीं.

बस इतना बोलकर वो अपने दोनों हाथ के अंगूठे से मेरी बांह को मसलने लगे और बोले- अरुणिमा … तुम कितनी बड़ी हो गयी हो.
फिर धीरे से मेरे कान के पास आकर बोले- और सेक्सी भी.

मैं मुस्कुरा दी.

वो मम्मी का हाल सुनने लगे, लेकिन उनकी नज़रें मेरी छाती पर ही टिकी थीं, जिसको मैं जानबूझ कर नज़रअंदाज़ कर रही थी.

मम्मी का हाल सुनने के बाद उनको कुछ दवा लिख दी. फिर वो उनसे घर और पापा के बारे में पूछने लगे.

उनसे बात खत्म करने के बाद उन्होंने मुझसे पूछा- अरुणिमा आप क्या कर रही हो?

इससे पहले मैं कुछ बोल पाती, मेरी मम्मी ने बोल दिया कि इस टाइम ये कुछ नहीं कर रही है. इंटर के बाद इनके पापा ने इसका प्राइवेट फॉर्म डाल दिया है. क्योंकि इसका पढ़ने में ज़्यादा दिल ही नहीं लगता है.

रोहित ने डबल मीनिंग में मुझसे पूछा- तो किस चीज में दिल लगता है?
इस पर मम्मी बोल पड़ीं- बस इसको तो घूमने का काम दे दो. इसको बाहर का खाना और मोबाइल … बस इसकी यही ज़िन्दगी है.

रोहित इस बात हंसने लगे और बोले- अरे चाची, इस उम्र में ये इस सबको नहीं करेगी … तो क्या हम आप करेंगे.
मम्मी ने हंस कर हां कहा.

उन्होंने बोला- अगर ये खाली ही रहती हो … तो इसको मेरे यहां रोज़ भेज दिया कीजिए. इसको मैं अपने साथ रखूंगा तो इसको जानकारी भी हो जाएगी और अगर ये आगे डॉक्टरी लाइन में कुछ करना चाहेगी, तो इसे आसानी होगी.
मम्मी बोलीं- हां ये सही बात है. दिन भर घर में पड़े रहने से अच्छा आपके पास आएगी तो कुछ सीख ही लेगी. मैं आज शाम को ही इसके पापा से पूछ कर आपको बताती हूँ.

मेरी मम्मी इतनी भोली हैं कि उनको लग रहा था कि वो डॉक्टर मेरी मदद कर रहा है.
लेकिन उनको क्या पता कि ये उनकी बेटी की फुद्दी लेने के चक्कर में है.

डॉक्टर के पास भेजने के लिए मम्मी तैयार हो गई थीं.
खैर … मुझे क्या … मुझे तो अपने लिए तो एक और लंड का इंतजाम होता दिख रहा था.

शाम को जब पापा घर आए तो मम्मी ने उनको सब बात बताई.
वो भी तैयार हो गए और पापा ने उसी टाइम रोहित को फ़ोन करके बात की.

फ़ोन रखने के बाद पापा मुझसे बोले- कल सुबह दस बजे रोहित के पास चली जाना … और अच्छे से मन लगा कर सब सीखना.

मैंने मन में सोचा कि मैं तो सब सीखी सिखाई हूँ. डॉक्टर कौन सा नया आसन सिखाने वाला है.

अगले दिन फिर मैं इसी तरह के कपड़े में गयी, तो उस दिन मैं उनके ही केबिन में ही जा बैठी और शाम तक उधर ही रही.

उन्होंने मुझसे बोला- अपना एक ड्रेस सिलवा लो, सफेद स्कर्ट और शर्ट.

मैंने हामी भर दी.
मुझे ड्रेस सिलवाने के लिए वो हरामी टेलर का लंड याद आ गया था.

उस दिन मैं वहां से आने के बाद सीधे अपने उसी चोदूमल टेलर के यहां कपड़ा लेकर गयी.

उस टाइम सब कारीगर थे तो उसने कपड़ा ले लिया और मुझे सुबह सात बजे बुलाया.

अगले दिन सुबह सात बजे मैं उसके पास गई, तो पहले तो उसने मुझे बहुत रगड़ कर चोदा. फिर मुझे ड्रेस दे दी.

मैं घर से नार्मल कपड़े पहन कर क्लिनिक गयी और रोहित के केबिन के अन्दर गयी.

मैंने उनको बताया- मैंने अपनी ड्रेस सिलवा ली है.
तो उन्होंने बोला- अरे वाह इतनी जल्दी … क्या रेडीमेड ली है.
मैंने कहा- नहीं सिलवाई है.

उन्होंने मुझे अपने वाले बाथरूम में जाकर ड्रेस बदलने के लिए कहा. वो बाथरूम कमरे के अन्दर ही था. मैंने उसमें जाकर बदलने चली गई.

जब मैं कपड़े बदल कर बाहर आयी, तो वो मुझे देखते ही रह गए.
रोहित बोले- कसम से बहुत खूबसूरत और बहुत सेक्सी हो आप.
मैं नजरें झुका कर शर्मा गई.

अब डॉक्टर रोहित के लंड की लालसा में मेरी चुत मचलने लगी थी जिसे मैं अगली बार की सेक्स कहानी में विस्तार से लिखूंगी.

लेडीज़ टेलर सेक्स कहानी पर आप मुझे मेल करना न भूलें.
अरुणिमा
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लेडीज़ टेलर सेक्स कहानी का अगला भाग: मुझे अपनी चुत गांड चुदवाने को लंड चाहिए-4