लॉकडाउन में लूडो से लौड़ा मिला

मेरी चूत की आग की कहानी में पढ़ें कि लॉकडाउन में मेरी चुदने की तलब बढ़ रही थी, पर कोई लंड नहीं मिला. एक दिन मेरी किस्मत कैसे खुली.

यह कहानी सुनें.

मेरे प्यारे दोस्तो, नमस्ते.
पहले तो आप सभी से मैं माफी चाहूंगी कि आप सबकी रिक्वेस्ट के बाद भी मैं कोई नई सेक्स कहानी नहीं लिख पाई.

आप सब जानते हैं कि कोरोना चल रहा है इसलिए बाहर का लंड लेने में डर लगता है.
मौके तो बहुत मिले पर लंड लेने का मन नहीं हुआ.

लेकिन वो कहते हैं ना कि तलब हो जिस चीज़ की, उसे किए बिना शांति नहीं मिलती.
तो मैंने मन की कर ली और आज आपके लिए मेरी चूत की आग की नई सेक्स कहानी लेकर आ गई हूँ.

ये चुदाई अभी हाल ही में हुई थी. उसी का मजा लिख रही हूँ.

मेरी चूत की आग अब बढ़ती रही थी, पर कोई शांत करने वाला नहीं मिला.

मैं अब गांव में रहने लगी थी और मेरे चाचा ससुर इस समय गांव में नहीं थे.
आपको याद होगा कि मैं अपने ससुर के छोटे भाई से चुदाई करवा चुकी थी.

मेरे पति शहर में ही थे. मैं दिन में काम करती और रात में अपनी तन्हाई को लेकर सो जाती.
मैं अक्सर बिना कपड़ों के ही सोने लगी थी कि कहीं किसी के तो अरमान खड़े हो जाएं और वो मुझे रगड़ कर चोद दे.

लेकिन सुबह तक कोई नहीं देखता था और मुझे मन मारकर बिना लंड लिए उठना पड़ता.

एक दिन मेरी किस्मत खुली. पर इस बारे में मुझे नहीं पता था.

हमारे घर के पीछे वाले घर में कोई रिश्तेदार आए थे. उनमें एक लड़का था जिसकी 3 साल पहले ही शादी हुई थी. उसका नाम राजू रख लेते हैं.

मैं एक दो बार उससे मिल चुकी थी. वो खुद ही हमारे घर आ जाया करता था.

हमारे इस गांव वाले घर में, मेरे चाचा ससुर रहते हैं, जो मेरी ले चुके हैं.
उनकी एक लड़की है, जिसकी शादी कुछ 7 साल पहले हुई थी. उसका नाम प्राची है.

वो अपनी ससुराल का घर छोड़ कर गांव में ही रहने लगी थी क्यूंकि उसके पति नशा बहुत करता था.

प्राची अक्सर राजू से मिलने उसके गांव जाया करती थी और मुझे उस बारे में पता था.

एक रात मैं प्राची के फ़ोन में ऑनलाइन ड्रेस देख रही थी. मैं उसकी गैलरी देख रही थी कि मेरे मन में हुआ कि उसकी हिडन फाइल्स देखी जाएं.

मैंने जब फोल्डर खोला, तो मैं देखते ही पूरी तरह से गीली हो गई. उसमें प्राची के हाथ में राजू का लंड लिए फ़ोटो था.
राजू का लंड पूरा काला और बड़ा मूसल जैसा था.

लंड देख कर मेरे मुँह से पानी टपकने लगा. मैंने किसी तरह खुद को संभाला और आगे के फोटोज देखे.
उसमें प्राची के मज़े लेते हुए काफी सारे फ़ोटो थे.

मैंने उसकी चैट खोली, तो राजू उसे मूड में होने पर अपने लंड का फोटो सेंड करता था.

मैं प्राची का फ़ोन लेकर बाथरूम में चली गई और उसके लंड के फोटो देखते हुए अपनी चुत रगड़ने लगी.

अब मेरी चूत फड़कने लगी थी और मन कर रहा था कि मोबाइल से लंड बाहर निकाल कर खा ही लूं. सेक्सी फोटो देख कर मुझे लगा कि प्राची के बहुत मज़े थे.

अब मुझे उसकी चुदाई के वीडियो देखने थे, पर उन्होंने कभी नहीं बनाए.

अब तक मैं 2 बार झड़ गयी थी. मैं जब बाहर आयी, प्राची बाहर ही खड़ी थी. वो मुझे ग़ौर से देखने लगी.

मैंने मोबाइल उसे दिया, तो वो बोली- देख ली ड्रेस!
मैं बोली- हां बहुत पसंद आई, पर स्टॉक में नहीं है.

प्राची को पता चल गया था कि मैं कौन सी ड्रेस देख रही थी.

शाम में राजू घर आया और बोला- सपना जी, चलो लूडो खेलते हैं.
मैं, प्राची, वो और उसका छोटा भाई हम चारों लूडो खेलने लगे.

लूडो खेलते समय वो प्राची की गोटी के पीछे पड़ गया था और उसकी तीन गोटिया आउट कर दीं.

अब वो अपनी गोटी लेकर मेरी गोटी के पीछे आया, तो मैं बोली- नहीं राजू, मेरी मत मारना.
वो मेरी तरफ देख कर बोला- क्यों प्राची की मार रहा था … तब तो आप मज़े से देख रही थीं. अब आपकी मार रहा हूँ, तो दर्द हो रहा है.

मैं हंसने लगी- यार आप बहुत खराब हो … पहले प्राची की सारी मार दी और अब मेरी भी मारने के पीछे पड़ गए.
प्राची बोली- हां, इन्होंने बस मारना ही सीखा है.

हम तीनों ही दोअर्थी बात का मजा ले रहे थे.

अब मेरी गोटी राजू की गोटी के पीछे थी. मैं बोली- राजू सावधान हो जाओ.
वो बोला- नहीं सपना जी … अभी देखो.

उसके 2 बार 6 आए. वो अपनी एक गोटी मेरे पीछे ले आया और बोला- आपको भी फिर से मरवानी है, चाहे आगे से मरवाओ … चाहे पीछे से!
मैं बोली- यार तुम तसल्ली से मार लेना, मगर अभी रुको तो!

मैं थोड़ा आगे बढ़ी.
मगर उसने फिर से मेरी गोटी मारी और बोला- लो जी, आपकी भी हमने पूरी मार दी.

मैं उठ कर चली गयी.
लूडो का गेम बंद हो गया और वो प्राची से बातें करते करते उसे लेकर चला गया.

अगले दिन सुबह प्राची को उसके घरवाले काम से खेत ले गए.

अब घर में मैं अकेली थी.
राजू आया और बोला- लूडो खेलोगी?
मैं बोली- नहीं यार, आप बस मारने में लगे रहते हो.

वो बोला- हां तो आगे आओगी, तो मारनी पड़ेगी ही ना!
मैंने बोला- मुझे नहाने जाना है. नहाकर खेलते हैं.
इतना बोल कर मैं नहाने चली गई.

थोड़ी देर बाद दरवाज़े की दरार से मेरी नज़र पड़ी कि राजू मेरी पैंटी पर अपना लंड रगड़ रहा है. वो मेरी सूखी हुई पैंटी निकाल उस पर अपनी हवस घिस रहा था.
मैं उसका लंड देखती रही.

उसने मोबाइल निकाला और उसे देख कर थोड़ी देर में अपना माल सारा खाली कर पैंटी से ही लंड पौंछ दिया.

वो घर चला गया.

मैं फटाक से बाहर गयी और वो गीली पैंटी ले आयी. मैं उसे सूँघने लगी … आह उसमें से वीर्य की क्या मदमस्त खुशबू आ रही थी.
मेरे एक हाथ में मेरी पैंटी थी और दूसरा हाथ मेरी चुत पर था. थोड़ी ही देर में मैं गीली हो गई थी.

मैंने वही पैंटी पहन ली और सारे कपड़े पहन घर का सारा काम निपटा सोने जाने लगी.

तभी राजू आ गया, वो बोला- अब फ्री हो, तो खेल खेलें!

मैंने मन में कहा कि हां राजू आज मेरा गेम बजा ही दो.

उसने गेम चालू किया.

थोड़ी देर में मेरी सारी गोटिया सेफ खेल रही थीं.
मैं बोली- आज मैं आपको मारने नहीं दूँगी.
वो बोला- थोड़ी देर रुको तो!

अब मेरी गोटी उसके आगे थी, तो वो बोला- अब आपकी पीछे से मारूंगा.

उसकी बात सुनकर मेरी बॉडी में करंट सा दौड़ गया.
उसे भी पता लग गया कि मैं गर्म हो रही हूँ.

थोड़ी देर में मेरी दो गोटियां उसके आगे पीछे थीं.

वो बोला- सपना जी आज आप अपनी पूरी मरवा के मानोगी, मैं आपकी आज दोनों तरफ से मारूंगा. आपकी मारने में मुझे बड़ा मजा आता है.
मैं पूरी तरह गर्म हो गई.

मैंने उसे देख कर अपना होंठ काट लिया और उसका हाथ पकड़ कर बोली- तो आज मार दो न मेरी.

उसने मेरी तरफ देखा और मुझे अपने पास खींच लिया.
वो मुझे चूमने चाटने लगा. मैं भी उसके कपड़े खोलने लगी.

उसने मुझे पकड़ा और अन्दर के रूम में ले गया. उसने मेरी साड़ी निकाल दी.

वो बोला- सपना जी आपकी हिलती गांड रोज़ मेरे लंड की हालत बुरी कर देती थी. आज आपकी ये मोटी हिलती गांड में इस लंड से और हवा भरने वाली है.

इतना बोला वो … तो मैंने पैंट के ऊपर से उसका लंड पकड़ लिया.
उसका लंड किसी गर्म सरिये जैसा हो रखा था.

उसने बोला- जब से गांव आया हूँ, तबसे आपकी गांड के सपने आने शुरू हो गए हैं. इस चक्कर में मैंने आपके नाम से कई बार मुठ मार दी है.
मैंने पूछा- मुठ मारी या प्राची की मारी?

ये सुनते ही उसके सुर बदल गए और वो आप से तुम पर आते हुए बोला- अच्छा तुझे ये भी मालूम है … मतलब साली सपना रंडी, तुझे सारा खेल का पता है.
मैं बोली- हां.

उसने मुझे नीचे किया तो मैंने उसकी पैंट उतारी और अंडरवियर निकालते ही उसका लंड बिल्कुल सांप की तरह बाहर निकल आया.

मैंने उसका लंड हाथ में ले लिया और बोली- क्या किस्मत है यार प्राची की … साली 4 सालों से इसी लंड पर कूद रही है.

उसने मेरा सर पकड़ा और पूरा लंड मेरे मुँह में घुसा दिया.

राजू बोला- साली रंडी, समझ ले अब से तेरी भी किस्मत चमक गयी है … तुझे भी जब चाहिए होगा, मेरा लंड मिल जाएगा.

मैं मूड में आकर उसका लंड चूसने चूमने चाटने लगी. उसे मज़े आ रहे थे.

वो बोला- ये लंड आज तेरी आगे पीछे से मारे बिना नीचे नहीं बैठने वाला. इसलिए तुझे जितना उछलना है, उछल ले!

शायद उसने शिलाजीत या कोई दवाई ली हुई थी और आज वो पहले से मेरी लेने के मूड में आया था.

अब तक मैं बड़े आराम से चूस रही थी.

वो बोला- क्या मस्त लंड चूसती है रे तू … तो तुझे तो कोठे में काम करना चाहिए.
मैं बोली- मैं बस चाहने वालों की रंडी बनती हूँ … हर किसी की नहीं.

उसने मेरे सारे कपड़े निकाल कर मुझे नंगी कर दिया और खुद लेटकर मुझे अपने ऊपर चढ़ा लिया.

अब मैं उसके लंड को अपने चुत पर सैट करके जोर से उछल कर बैठ गयी.
सट की आवाज़ के साथ उसका पूरा लौड़ा मेरी चुत को चीरते हुए जड़ तक घुस गया.

मैंने ‘आह्ह्ह ..’ की आवाज़ निकाली तो उसने मेरी कमर पकड़ी और मुझे जोर से ऊपर नीचे करने लगा. फिर मुझे खुद से चिपका लिया और खुद ऊपर नीचे हो मेरी मारने लगा.

मैं पूरी मदमस्त होकर होश खोकर चुद रही थी. मुझे पूरे मज़े आ रहे थे. मेरी चुत से उसका लंड भीगता जा रहा था.
शायद काफी टाइम बाद लंड मिलने की वजह से मेरी चुत इतना पानी छोड़ रही थी.

अब उसने मुझे लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गया. चुत पर लंड सैट करके मेरा गला पकड़ लिया और जोर का धक्का देकर चुत में लंड घुसा दिया. फिर मेरा गला छोड़ मेरा मुँह पिचका दिया और जोर जोर से लंड धकेल कर मेरी चुत चोदने लगा.

मैं गांड उठाते हुए बोली- आह राजू … सच में प्राची और आपकी बीवी इतना मस्त आनन्द अकेली ही उठा रही थीं.

उसने मेरे गाल और टाइटली पकड़ लिए और जोरदार झटका देकर लंड इतना अन्दर घुसा दिया कि मेरी आंखों से पानी निकलने लगा.
इतना दर्द मैं सहन नहीं कर पा रही थी. मैं सोच रही थी कि प्राची की चूत तो फैल कर भोसड़ा बन गयी होगी.

मैंने भी उसे कास के पकड़ लिया और थोड़ी देर वो मेरी चुत में एक तेज रगड़ के साथ झड़ गया.

मैं बोली- आह राजू कितना मज़ेदार चोदते हो तुम.
वो बोला- हां मेरी रंडी, अभी तेरी गांड भी मारना चाहता था, पर थक गया हूँ. लंड वापस उठेगा, तब तेरी गांड तोड़ कर रख दूंगा.

मैं ये सब सुनकर मस्त हो गई थी कि राजू का मजबूत लंड मेरी गांड में भी जाएगा. मगर मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी.

कुछ मिनट वो नंगा ही मुझसे लिपट कर लेट गया.
थोड़ी देर बाद मैंने उससे बोला कि यार मुझमें हिम्मत नहीं बची है. तुम मेरी गांड कल मार लेना.

वो बोला- नहीं, गांड तो तेरी आज ही टूटेगी.
मैंने उससे बोला- अच्छा आधी रात के बाद जब सब सो जाएंगे, तब तुम घर की अगली झोपड़ी में आ जाना, वहां गांड मार लेना.

वो मान गया और चला गया. शाम को सब घर वापस आए.
मैं तब तक बेसुध सोती ही रही थी.
रात तक मुझे दर्द था और हिम्मत भी नहीं हो रही थी. शायद मैं बुरी तरह से झड़ चुकी थी और मेरा दम निकल गया था. हालांकि मन नहीं मान रहा था.

आधी रात बाद उसका फ़ोन आया.
मैं उसके साथ चुपचाप आ गई.

उसने दरवाज़ा बंद करके मुझे बिस्तर पर उल्टा पटक दिया और साड़ी ऊपर करके मेरी गांड पर थोड़ा थूक लगाया.

मैंने बोला- आराम से सांड जी.
वो बोला- चुप कर जा साली रंडी, तेरी गांड के लिए मैं सोया भी नहीं हूँ.

उसने धक्का देकर लंड गांड में घुसा दिया.
मैं दर्द से चीख उठी.

वो बोला- भोसड़ी की … रंडी साली … गंडमरी औरत. दस लंड साथ लेने की बात करती थी … एक लंड में तेरी आंखें चढ़ रही हैं.

उसकी गाली भरी बातों से मुझे हिम्मत आ गयी, मैंने आंसू साफ किए और बोली- चल लगा जोर … फ़ाड़ मेरी गांड … चोद डाल मुझे.
तब उसने मेरे बाल खींचे और बोला- कुतिया तेरी गांड में गद्दे लगे हैं … आह मज़ा आ रहा है.

वो मेरे बाल खींचते हुए मेरी गांड मारे जा रहा था.
मेरी 15 मिनट तक गांड बजाने बाद उसने मुझे सीधा किया और सारा माल मेरे मुँह पर छोड़ दिया.

दस मिनट तक मैं बेसुध पड़ी रही.

मैं फिर नंगी ही बाहर जाकर मुँह धोकर वापस आयी, उसी समय राजू के छोटे भाई ने देख लिया.
वो पीछे से झोपड़ी में आ गया.

आगे कैसे प्राची और राजू के छोटे भाई के साथ हमारा ग्रुप सेक्स हुआ, ये सब मैं आपको अपनी अगली सेक्स कहानी में बताऊंगी.

उम्मीद है कि आपका लंड खड़ा हो गया होगा और आप मुठ मारने की सोच रहे होंगे. मगर मेरी जान, पहले मेरी चूत की आग की कहानी कैसी लगी, एक मेल तो लिख दो.
आपकी प्यारी सी सपना
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